Friday, February 13, 2026

सरताज

खामोश तुम हो
बेआवाज हूं मैं
बेचैन बदहवास 
परवाज हूं मैं

तुम्हारे ही चर्चे 
जमाने भर में हैं 
हिजरत-ए-वफा 
गमनवाज हूं मैं

बेदखल आंखे
बरसती रही 
फिरभी नाकारा 
बेअंदाज हूं मैं 

यूं तो हुए हैं 
दिवाने कई
सर-ए-आशिक
सरताज हूं मैं 

- संदीप भानुदास चांदणे (शुक्रवार, १३/२/२०२६)

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सरताज

खामोश तुम हो बेआवाज हूं मैं बेचैन बदहवास  परवाज हूं मैं तुम्हारे ही चर्चे  जमाने भर में हैं  हिजरत-ए-वफा  गमनवाज हूं मैं बेदखल आंखे बरसती रह...