कयामत है के अभी तक जिंदा हो तुम
सामने आती हो तो यकी नही आता
खुली आँखों का जैसे सपना हो तुम
अंजाम मुफ्लीस मुहब्बत का और क्या है?
जिंदगी-ए-नाकाम का इनाम हो तुम
- संदीप भानुदास चांदणे (शनिवार, १४/१२/२०२४)
मधुर शीळ मी वार्याची, पावसाची मी सन्ततधार, सडा पाडतो गीतांचा, मी शब्दांचा जादूगार....
ये रात आयेगी फुलो के साथ महकी हुई बहकी हुई सोचा न था ये रात आयेगी आई है जैसे मलमलके आंचलसे लिपटी बहारोसे खुशबू की महकी हवाये हो गाती हुई मिठ...