कयामत है के अभी तक जिंदा हो तुम
सामने आती हो तो यकी नही आता
लगता है खुली आंखो का सपना हो तुम
अंजाम मुफ्लीस मुहब्बत का और क्या है?
जिंदगी-ए-नाकाम का इनाम हो तुम
- संदीप भानुदास चांदणे (शनिवार, १४/१२/२०२४)
मधुर शीळ मी वार्याची, पावसाची मी सन्ततधार, सडा पाडतो गीतांचा, मी शब्दांचा जादूगार....
खामोश तुम हो बेआवाज हूं मैं बेचैन बदहवास परवाज हूं मैं तुम्हारे ही चर्चे जमाने भर में हैं हिजरत-ए-वफा गमनवाज हूं मैं बेदखल आंखे बरसती रह...
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