Saturday, December 14, 2024

नाकाम मुहब्बत का इनाम हो तुम

किसी नाकारा दुआ की इंतेहा हो तुम
कयामत है के अभी तक जिंदा हो तुम

सामने आती हो तो यकी नही आता
खुली आँखों का जैसे  सपना हो तुम

अंजाम मुफ्लीस मुहब्बत का और क्या है?
जिंदगी-ए-नाकाम का इनाम हो तुम

- संदीप भानुदास चांदणे (शनिवार, १४/१२/२०२४)

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