पॉंव जरा दुबक गये
मुडके देखा तो पाया
तुम वहींसे गुजर रहें
एक नया सितारा
दिखा सूने गगनमें
बिनबहार गुलीस्ता
खिल गया चमनमें
खुशनुमा हुए दिन
रातें जैसे गाने लगी
बेमुरव्वत जिंदगी
आके गले लगने लगी
तसव्वुर में तुम रहें
नया नगमा सुनाते
गम खुशी चलते रहे
कदम साथ मिलाते
काश! ये पल थमें
चले ना, यही रूके
चलता रहे सफर
जब तक चल सके
सांसोसे हो बंधी सांस
गुलसे महक हो लिपटी
जहन में कुछ ना हो
यही आखरी ख्वाईश हो
- संदीप भानुदास चांदणे (शनिवार, २२/०२/२०२५)