खुदिको ढूंढे और खुदिको मिल आये
बहुत जर्जर हो चली अपनी दास्ता
धागा-ए-इश्क लेकर इसे सिल आये
किसीका जीत ले इल्म-ए-हासील सें
किसी हबीबको दे अपना दिल आये
हो तरन्नुम-ए-हयात चमन से आश्ना
सुनें तो गुलोंकी बहारें खिल आये
- संदीप चांदणे (मंगळवार, ८/११/२०२१)
मधुर शीळ मी वार्याची, पावसाची मी सन्ततधार, सडा पाडतो गीतांचा, मी शब्दांचा जादूगार....
खामोश तुम हो बेआवाज हूं मैं बेचैन बदहवास परवाज हूं मैं तुम्हारे ही चर्चे जमाने भर में हैं हिजरत-ए-वफा गमनवाज हूं मैं बेदखल आंखे बरसती रह...
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