Thursday, January 24, 2013

एक उदास संध्याकाळ

कुठली अनामिक ओढ ही
रेंगाळणाऱ्या सांजेला
दूर क्षितीजी पिवळी गुणगुण
हुरहुर लावी मनाला

शहारत्या पाठी कुरणांच्या
तिरप्या नजरा रविकिरणांच्या
शब्द न पुरवी गीताला
तळ्यातल्या रांगा बदकांच्या

दुर्लक्षित थवे पक्ष्यांचे
अन् किणकिण घंटा गायींच्या
उलगडता न उलगडणाऱ्या
घड्या हाता पायांच्या

माळावरची जलद सावली
नकळे भरभर कुठे चालली
अकस्मात ही निसर्गचित्रे
पापण्यांच्या कडांत बुडाली

- संदीप भानुदास चांदणे 

No comments:

Post a Comment

अकबर बिरबल (बँक व्हिजीट)

अकबर बिरबल ( बँक व्हिजीट ) ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------...